बिहार का मुजफ्फरपुर जिला शाही लीची के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द है. यहाँ से सिर्फ लीची ही नहीं बल्कि लीची से बने शहद की भी बड़ी डिमांड रहती है. इसबार कई मधुमक्खी पालक भी लीची के पेड़ो में मंजर को देख कर काफी उत्साहित है. यूपी के सीतापुर में नीरज और रूपेश कुमार बताते हैं कि तोड़ी के बॉक्स में मधुमक्खी रखी गई है. लेकिन यहाँ मौसम विपरीत है जिससे शहद नहीं निकल पाया। लीची में तेजी से विकास हो रहा है और शहद की मांग बढ़ी है। अप्रैल से शहद निकलने की उम्मीद है, जो मांग को पूरा करेगा।

यूपी के सीतापुर में कुढ़नी के नीरज कुमार और रूपेश कुमार डेरा डाले हैं। तोड़ी अर्थात सरसों के खेतों में मधुमक्खी का बॉक्स रखा गया है। अब जैसे-जैसे तोड़ी का समय ख़तम हो रहा है सभी मधुमक्खी पालक लीची वाले इलाके अपने बॉक्स लेकर जाने लगे है.


इस वर्ष शहद की पैदावार अच्छी नहीं हुई है. सैकड़ों मधुमक्खी पालकों को नुकसान हुआ है। लेकिन लीची के पेड़ो में आये नए मंजर को देख कर कहा जा सकता है की अब लीची वाले शहद का पैदावार अच्छा होगा. लीची के मंजर में तेजी से विकास हो रहा है। लीची के मंजर से फूल खिलने लगेंगे।

इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर की शहद को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है। लोगों की मांग लगातार बढ़ रही है। वो समय अब नजदीक आ गया है और अप्रैल के पहले सप्ताह से शहद निकलना शुरू होगा। 15 अप्रैल के बाद नये सीजन का शहद उपलब्ध होगा।

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