सफलता की रह हमेशा ही कठिन होती है. एक तुक्के के सफलता कभी नहीं टिकती लेकिन अगर धीरे-धीरे कड़ी मेहनत करके सफलता अर्जित की जाये तो वो हमेशा साथ निभाती है. परिश्रम से प्राप्त की गई सफलता में आत्मसम्मान होता है. आज की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसमे शिवम् ने तीन बार फेल होने बाद भी हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में सफल हुए.
यूपीएससी (Union Public Service Commission (संघ लोक सेवा आयोग)) जैसी परीक्षा में सफलता पाना आम बात नहीं है. इस परीक्षा की तैयारी में लाखों युवा हर साल अपना बेस्ट देते हैं. अक्सर लोग इस प्रक्रिया में विभिन्न कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं ताकि उनकी तैयारी में निरंतरता और दिशा मिल सके. लेकिन कुछ ऐसे उत्साही युवा भी हैं जो अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से अपने लक्ष्य को हासिल कर लेते है उन्ही में से एक नाम शिवम है.
शिवम् रेवाड़ी शहर के गुलाबी बाग के रहने वाला है. शिवम ने पहले ही सोच लिया था की एक दिन बड़ा अधिकारी बनूँगा. वो निरंतर मेहनत करते रहे. उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि वे अपनी प्रतियोगी परीक्षा (संघ लोक सेवा आयोग) में बिना किसी कोचिंग संस्थान के सहारे 457वीं रैंक हासिल करने में सफल हो गए है. यह शिवम् का चौथा एटेम्पट था. वो इससे पहले तीन बार असफल हो चुके थे.
शिवम का बचपन से ही मेधावी रहना उनके प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का एक गहरा कारण बना. उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और फिर आईआईटी गुवाहाटी से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की. शिवम् की पिता एक टैक्सी ड्राईवर है. माँ एक गृहणी है.
आगे अब अधिकारी बन का क्या करना है के जवाब में शिवम् ने कहा की मै देश के बच्चो केलिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था करना चाहता हूँ. उन्होंने आगे कहा की बच्चे देश के भविष्य है. अगर उनको अच्छी शिक्षा मिली तो देश का बहुत हित हो पायेगा.