आज से मात्र 7-8 वर्ष पहले ई-रिक्शा का बिहार समेत पुरे भारत में नामो निशान नहीं था. लेकिन अब पुरे शहर और गांव सभी जगह सड़क पर सिर्फ ई-रिक्शा ही दिखाई देता है. अब जरुरी हो गया है की इसको लेकर नए नियम और इसके रूट को परिभाषित किया जाये. कोई भी ई-रिक्शा, कही भी , किसी भी रूट पर अपने मन के किराया के साथ चल रही है. इस पर अंकुश लगना चाहिए. अब तो तरह तरह के इस ई-रिक्शा के संगठन भी खुलने लगे है.
भागलपुर जिले में एक संगठन जो ई-रिक्शा पर रिज़र्व का बोर्ड लगाने की अनुमति दे रहा है. जिसके बदले में वो ई-रिक्शा संगठन सभी ई-रिक्शा वालों से 300 रुपया चार्ज कर रहा है. लेकिन यह ई-रिक्शा संगठन को कोई भी मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे में ई-रिक्शा पर रिज़र्व का बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा इस ई-रिक्शा संगठन द्वारा कोडिंग भी दी जा रही है.
वर्तमान में ट्रैफिक नियम के अनुसार किसी भी ई-रिक्शा पर रिज़र्व का बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं है. अगर कोई ई-रिक्शा वाला रिज़र्व का बोर्ड लगा कर इधर-उधर जाते-आते पकड़ा जाता है तो उसको 5000 हजार तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ में चालक को दण्डित की किया जा सकता है. कोई भी कोडिंग कलर रूट कोडिंग पर अभी अधिकारीयों द्वारा निर्णय नहीं आया है.
मिली जानकारी के अनुसार भागलपुर में सभी ई-रिक्शा को रूट और कोडिंग पर काम चल रहा है. जल्दी ही सभी को अलग – अलग रूट और कोडिंग निर्धारित किये जायेंगे. उससे पहले किसी भी तरह का बोर्ड को मानयता नहीं है.